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Bihar News: AI Summit में CM सम्राट चौधरी का बड़ा संदेश, कंप्यूटर नहीं सीखने वाले सरकारी कर्मचारियों पर होगी कार्रवाई

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | AI Summit में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सरकारी कर्मचारियों की तकनीकी दक्षता पर बड़ा बयान दिया। कंप्यूटर प्रशिक्षण, सोशल मीडिया की समझ और AI के उपयोग को लेकर सरकार की नई सोच सामने आई।

पटना, 6 अगस्त। आलम की खबर: बिहार को डिजिटल और तकनीक आधारित प्रशासन की ओर तेजी से आगे बढ़ाने के संकेत देते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को आयोजित AI Summit में सरकारी कर्मचारियों की कार्यशैली पर बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अब सरकारी संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए केवल पारंपरिक कामकाज पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि कंप्यूटर, डिजिटल तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सोशल मीडिया की समझ भी अनिवार्य होगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि जो कर्मचारी कंप्यूटर चलाना नहीं जानते, उन्हें पहले प्रशिक्षण दिया जाए और प्रशिक्षण के बाद भी यदि वे तकनीकी रूप से सक्षम नहीं बनते हैं तो उनके स्थान पर सक्षम लोगों को अवसर दिया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में विधानसभा अध्यक्ष से आग्रह करते हुए कहा कि जिस प्रकार समय-समय पर विधायकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, उसी तरह विधानसभा के कर्मचारियों के लिए भी नियमित प्रशिक्षण व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रत्येक दो महीने पर प्रशिक्षण सत्र आयोजित हों ताकि कर्मचारी नई तकनीकों और डिजिटल बदलावों के साथ स्वयं को लगातार अपडेट रख सकें।

सम्राट चौधरी ने कहा कि किसी भी जनप्रतिनिधि का सहयोगी स्टाफ तकनीकी रूप से इतना सक्षम होना चाहिए कि वह जनप्रतिनिधि के कार्यों को और अधिक प्रभावी बना सके। उन्होंने कहा कि यदि कोई कर्मचारी अपने विधायक या अधिकारी से भी कम तकनीकी जानकारी रखता है तो यह व्यवस्था के लिए उचित स्थिति नहीं मानी जा सकती। इसलिए कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आज के दौर में केवल कंप्यूटर चलाना सीख लेना पर्याप्त नहीं है। सरकारी कर्मचारियों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की कार्यप्रणाली, डिजिटल संचार और जनता तक सूचनाएं पहुंचाने के आधुनिक तरीकों की भी जानकारी होनी चाहिए। फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिए सरकार और जनता के बीच संवाद का दायरा लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में कर्मचारियों का डिजिटल रूप से प्रशिक्षित होना जरूरी है।

अपने संबोधन में उन्होंने सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर भी चिंता जताई। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज तकनीक के माध्यम से कृत्रिम तरीके से बड़ी संख्या में प्रतिक्रियाएं और टिप्पणियां दिखाई जा सकती हैं, जिससे कई बार वास्तविक स्थिति का गलत संदेश जाता है। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बिना सत्यापन के फैलने वाली सूचनाएं समाज के लिए चुनौती बन रही हैं और ऐसी परिस्थितियों से निपटने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

सम्राट चौधरी ने पारंपरिक मीडिया और सोशल मीडिया के अंतर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि समाचार पत्रों और स्थापित मीडिया संस्थानों की अपनी विश्वसनीयता होती है, जबकि सोशल मीडिया पर बिना प्रमाण के भी कोई भी जानकारी तेजी से लाखों लोगों तक पहुंच जाती है। इसलिए डिजिटल युग में सही और गलत सूचना की पहचान करना पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

मुख्यमंत्री के इस संबोधन को केवल विधानसभा कर्मचारियों के लिए निर्देश नहीं बल्कि पूरे सरकारी तंत्र के लिए भविष्य की कार्यशैली का संकेत माना जा रहा है। उनके बयान से साफ है कि आने वाले समय में बिहार सरकार प्रशासनिक व्यवस्था में तकनीकी दक्षता, डिजिटल संचार और AI आधारित कार्यप्रणाली को प्राथमिकता देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगी।

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सरकारी व्यवस्था में तकनीकी बदलाव अब समय की जरूरत

सरकारी कामकाज तेजी से डिजिटल हो रहा है। ऐसे में कर्मचारियों का तकनीक से जुड़ना केवल सुविधा नहीं बल्कि आवश्यकता बन गया है। नियमित प्रशिक्षण से कर्मचारियों की क्षमता बढ़ेगी और आम लोगों को भी बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी। हालांकि प्रशिक्षण के साथ आधुनिक संसाधन और बेहतर कार्य वातावरण उपलब्ध कराना भी उतना ही जरूरी होगा। तकनीक और मानव संसाधन के संतुलित उपयोग से ही डिजिटल बिहार का लक्ष्य सफल हो सकेगा।

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